जल और जीवन

जल है तो कल है ‘ जल है तो जीवन है । जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती । चल या अचल जीवन के लिये पानी आवश्यक है। पानी के बिना धरती बंजर व विरान हो जाएगी ! हरियाली समाप्त हो जाएगी । बिन पानी की कल्पना करना भी भयंकर प्रतीत होता है। भोजन के बिना कुछ समय रहा जा सकता है लेकिन पानी के बिना जीना संभव नहीं।  सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के लिये जल आत्मनिर्भरता जाती हैं। इसी के तहत राजस्थान के उदयपुर शहर में आयोजन रखा गया जिसकी थीम भारत 2047 – एक जल सुरक्षित राष्ट्र है। वाटर विजन 2047 को लेकर राष्ट्रीय कांन्फ्रेंस के आयोजन में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। राज्य सरकार राज्य में कम पानी वाली फसलों , शहरी जल प्रबंधन .सीवरेज पानी का शुद्धिकरण ‘ जलगुणवत्ता और स्त्रोतों की निगरानी के लिये सरकार कई कदम उठा रही है। रामजल सेतु परियोजना और यमुना जल समझोते से राज स्थान को लाभ होगा। आयोजन के प्रथम दिवस पर जलसंसाधनों के प्रभावी प्रबंधन , भंडारण अवसंरचना विकास , सिंचाई परियोजनाओं के सुद्दढीकरण और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिये गहन विचार किया गया । नदी जोड़ो परियोजना को रफ्तार से बढ़ाने , छोटे जल भंडारण ढ़ांचे विकसित करने और पारम्परिक जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन पर ध्यान आकर्षित किया गया।   यमुना नदी का पानी राजस्थान लाने हेतु प्रयास किया जाएगा । छोटे तालाब बनाकर पानी को उपयोग में लाया जा सकता हैं क्योंकि अनेक नदियों का जल बहकर पड़ोसी देशों मे चला जाता है या समुद्र में मिल  है , उस जल का सदुपयोग कर हम आने वाली पीढ़ियों को समृद्ध बना सकते हैं। अधिक मात्रा में वृक्ष लगाकर या जंगल बचकर पानी की भूमिगत मात्रा में वृद्धि और घरों में वर्षा का जल इकट्ठा कर दैनिक जीवन एवं भूमिगत जल की वृद्धि की जा सकती हैं । आवश्यकता है कि जल के संरक्षण के लिये जागरूकता हो और हर एक व्यक्ति का कर्तव्य भी कि जल को संरक्षित करने में अपना सहयोग प्रदान करे । अनावश्यक रूप से जल का दोहन करना गंभीर हैं । वर्तमान समय में जहां सरकार द्वारा उपनगरीय क्षेत्रों में व गाँवों कस्बों में पानी की सप्लाई हेतु व्यवस्था नहीं की गयी है वहां हरएक घर में बोरिंग [ ट्यूबवैल ] खुदवाकर  पानी का दोहन किया जा रहा है । इससे एक तो धरती छलनी हो रही हे वहीं जल का दुरूपयोग भी बढ़ रहा हैं । कहने का तात्पर्य यही है कि जल का प्रबंधन उचित हो और आने वाले कल को ध्यान में रखकर जल को सहेजना की आवश्यकता है। 

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